• roshan_kumar 31w

    सूर्यास्त हुआ एक ओर जहाँ कोई नया सवेरा लिए।

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    सरकते सरकते वो आ बैठे यूँ पास हमारे
    जैसे सूरज एक छोर से नापता है गगन पूरा

    शर्म से जैसे लाल हो जाता है वो देख मंजिल को
    ठीक वैसा ही रंग निखरा है उनकी आँखों का

    उस हया की लाली का गवाह तो सारा जहां बन बैठा
    पर उनकी हया का एकलौता गवाह ये दिल बन बैठा।

    ©roshan_kumar