• _raj_kr_ 23w

    माफ़ कीजिए।

    गालियाँ रखी पड़ी है ज़ुबान पर सालों से
    अब आप थोड़ा मज़ाक कीजिए।

    क्या हुआ दोस्ती हो गयी वीराने से,
    बाहर देखें, गुरुर की दीवारों को ख़ाक कीजिए।

    कब तक अँगारे निकलते रहेंगे उनमें से,
    शर्म,हया लाइए उनको आँख कीजिए।

    जब से दुनियाँ बनी,इश्क़ अकेला है तब से,
    कोई हमसा खोजिए,खुद से इंसाफ़ कीजिए।

    कहाँ फ़र्क़ पड़ता है आपको हमारी हिदायतों से,
    गलती हुई,हमारा दिल लौटाइए,हमको माफ़ कीजिए।
    ©_raj_kr_