• philosophic_firefly 10w

    आज दिल था की कहीं जाऊं
    किसी से अपने दिल की सारी बातें करूं
    और मुस्कुराऊं
    तो इसीलिए आज मैं गई अपनी बहन के पास
    जिसके साथ बीता था मेरा बचपन
    और जिसके साथ
    बीता मेरा आज।
    उसने मुझे अपनी ज़िन्दगी की कहानी सुनाई
    और मैं सुनती रही
    मुस्कुराती रही
    और कभी कभी उसके बालों को भी
    देखती रही
    अब वो पूरी तरह दिखने में बदली बदली सी थी।
    उसे अब मिट्टी के खिलौने नहीं पसंद
    उसे तो पसंद है मेक अप और मस्कारा
    और लिपस्टिक के खूबसूरत गहरे रंग
    वो मुझे सब बताती रही और मैं
    ताज्जुब से उसे देखती रही
    कभी कभी तो उसकी बातों पर खूब हसी।
    फिर जब उसने मेरे बारे में पूछा
    तो मैं शांत हो गई
    किसी खामोशी की खाई में गिर पड़ी
    समझ ही नहीं आया की क्या कहूं
    और ना ही ये समझ आया की कहूं ना कहूं
    एक असमंजस में फस सी गई थी मैं।
    मैंने उससे कहा अब तुम बदल गई हो।
    उसने हस्कर कहा, तुम भी।
    और हम दोनों ही शायद बदल गए थे।
    मैंने उसे बताया की अब मैं चीज़ों की हकीकत
    समझने लगी हूं
    और हवाओं का राज़ जानने लगी हूं
    मैं उसे बताती रही, की अब मैं खुद की
    तलाश करती हूं और ज़्यादा से ज़्यादा ख़ुद से
    बात करती हूं
    मुझे अब मैं अच्छी लगने लगी हूं।
    पागल! वो हसकर बोली।
    हां, आएशा! ऐसा ही है।
    मैंने उसे यकीन दिलाया।
    तुम नहीं जानती की ये ज़िन्दगी कितनी अजीब
    और पेचीदा है
    खूबसूरत होते हुए भी जटिल
    और रिश्ते बिल्कुल नाजुक पंख
    जिनका अगर ज़रा सा भी खयाल ना रखा जाए
    तो उड़ जाया करते हैं।
    मैं उसे बताती रही।
    वो शायद बोर होने लगी थी,
    मैंने उसका चेहरा पढ़ लिया था।
    कविताएं होती ही कितनी गहरी और मीठी हैं
    पढ़ो तो ऐसा लगता है जीवन का पूरा संदर्भ
    इसी में समा गया है
    और ये बहते बादल, इन्हे देखो
    आसमान के फूल लगते हैं
    बिल्कुल लहराते हुए जादू के गुब्बारे।
    उल्फत, क्या हो गया है तुम्हे? वो हसने लगी।
    मैं समझ गई, मुंह बंद करना बेहतर है।
    अच्छा खैर, तुम्हे पता है
    मैंने परसों ही एक नया आईलाइनर लिया है
    बिल्कुल काला और उससे तो आंखों पर
    कोई साइड इफेक्ट भी नहीं पड़ता
    अच्छा है, तुम भी ट्राय करो आएशा!
    अब वो मेरी बातों में शामिल हो गई, और
    ऐसे मुझमें घुल गई
    जैसे लगता था उसे उसके पसंद का
    खेल मिल गया हो।
    मैंने उस वक़्त मन में कहा
    अल्लाह ताला, मैं समझ गई हूं
    की आपने मुझे लिखने की काबिलियत क्यों बख़्शी!
    आपका शुक्रिया!
    मैं अब दिल से मुस्कुराई
    और अपने दिल की कहानी
    अपने आप को ही सुनाई
    हां, अब मैं समझ सकती हूं ख़ुद को
    और अब मै ये भी जान सकती हूं की
    मुझे मुझसे प्यार क्यों है!

    ©philosophic_firefly