• aryanpahariya 24w

    By - ARYAN MADAN MOHAN PAHARIYA

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    आज मै यहा हूँ, जाने तुम कहा हो,

    करना है रूबरू तुमसे, जाने क्यूँ गुमसूमाँ हो,

    क्यूँ मुह मोड़ लिए तुम, क्यूँ दिल तोड़ लिए तुम,

    चलना एक ही राह पर है, फिर जाने क्यूँ खफा खफा हो,

    मिलना वही है इस जहाँ के सभी को, जहा खुदा की महा सभा हो,

    एक झलक, एक पलक, एक मीठी मुस्कान, सब आँखो में छोड़ गए तुम,

    मै अभी भी वहा हूँ, जाने तुम कहा हो....