• piu_writes 9w

    सौ गम है यहाँ और भी है मत बात करो मुहब्बत की , जीना चाहते है तो ज़िन्दगी नहीं मिलती और न मिलती है नियामत मौत की ।। सेहरा सेहरा घूम रहे है ख़्वाब लिए बरसात की, दिल लगाए बैठे है उनसे जो कारसाज़ है मेरे मात की ।। रहने दो हुस्नो -इश्क़ के चर्चे खौफनाक है हालात अभी , जीयेंगे तो आगे सोचेगें सजावट शबे बारात की ।। वो कौन है जो चुभोते है नश्तर और बात करते है खयरात की मिल रहे है जख्म पे जख्म बिन मांगे बरसात सी ।। आस की किरण लापता है ज़िन्दगी सियाह रात सी
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