• pragatisheel_sadhak_bihari 23w

    आओ ये जो बुझती समां है,
    उसमें तुम अपनी निगाहों से आकर ईंधन डाल दो,
    देकर छाँव अनगिनत मेरी कसमसाहट को,
    आओ थोड़े लबों से अब मुझमें भी साँसें उधार दो,
    दो पल ही लो सही,
    आओ जरा करवटों संग खेल होली,
    खुद में भी थोड़ा रंग डाल कर,अपने इरादे भी संवार लो।

    ©gatisheel_sadhak_bihari