• andaaz_e_shaayaraana 10w

    अपना ही गोया रास्ता...
    अपनी ही मंज़िल...
    अपना ही सहारा है "अंदाज़"...
    बोहत कम इमकान है, जो मिलता नहीं कोई ग़मखार...
    दे मुझे कोई ताईद मोहब्बत की,
    मिटा दे मेरी तन्हाई, कर दे मुझपर अशफ़ाक...
    फ़िर मिलें तो मिलें सौ रोग - सौ ज़ख्म...
    फ़िर वही हो शिफ़ा मेरी - वही हो मरम्मत मेरी...
    उसी से दुरुस्त हो मेरा इलाज...

    * "इमकान = संभावना", * "ग़मखार = हमदर्द"
    * "ताईद = समर्थन", * "अशफ़ाक = एहसान"
    * "शिफ़ा = इलाज करने वाला"

    - अंदाज़ - ए - शायराना