• aaditi_ 9w

    Part-7 #a_talk_with_parents
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    #a_talk_with_teenagers

    सिलसिला आगे बढ़ाने का वक्त आ गया,
    शहर से थोड़ा दूर गाँव जाने का वक्त आ गया,
    तो यहापे राहें बहोत मिलती है।
    अरेरे! अरेरे! कहा चलें गये? गाँव की नहीं,
    गाँव वाले संस्कारों की राहें बहोत मिलती है।

    घर नहीं जी वो संस्कारों का भंडार होता है,
    संसार नहीं वो सपनो का आशियाना होता है।
    जहाँ कोई बच्चा शायद बस,
    पढ़ाई की वजह से रोता है।

    माँ डांटे तो काका जी बचा लेते है,
    पापा चिल्लाते की,“छोटे भाई इन
    छोटे मिया को सिर पे चढ़ा रखा है।”
    फिर दादी जी की डांट दोनो को खानी पड़ती है,
    बहुरानी को रसोई में भेजकर,
    दादीजी बच्चे और उसके काका की जमके चंप्पी करती है।

    ना ना रंग ना सजाओ अभी पुरे थोड़ा रूक जाओ,
    हम तो अपनी बात का माहोल बना रहे है।
    चलो अब इनकी खासियत बताते है,
    वहा पे संस्कार, शरारतो को बढावा देने वालै,
    मुश्किल में साथ निभाने वाले बहोत लोग है।

    (चलों देखे और क्या है वहा।)

    दादी की डा़ट सुनते ही दादाजी,
    हाथ में लाठी लेके, एक हाथ से चश्मा ठीक करते करते,
    “और कितना डा़टोगी?बच्चे है, तुम्हारे हमारे जैसे बूढे नहीं”,
    कहते हुए दादी के आगे आते है।
    “दादीजी हमारी बूढी कहा है?”,
    ये सवाल करके छोटे मिया अपने दादाजी को फसा देते है,
    सुनते ही यह बात, काकाजी अपनी माँ के गाल खिच लेते है,
    “माँ से ज्यादा कोई young है यहा?” यह बात बढा़ देते है।

    दादाजी भोले-भाले पूरी डा़ट सुन लेते है,
    दादी-भी दादा-जी से ८ साल छोटी होने की बात कह देती है।
    अपने बच्चे और पोते पर प्यार ही इतना होता है,
    की दादाजी, दादी की डा़ट सिर निचे झुकाके सुन लेते है।

    अब यहा माँ-पापा और T.V. की जगह ये,
    दादा-दादी पुरी कर देते है।
    और शायद ही यहापे कोई दुःखी होता है,
    क्यू? क्योकीं इस हसीन दुनिया से बाहर कोई जाना ही नहीं चाहता है।

    जाना भी क्यू चाहे?,
    हर एक दोस्त होता है यहा।
    दादी-जी की डा़ट उसके लिए सही है,
    यह बात छोटे बच्चे भी समझा करते है यहा।

    यही बात हमें अपने घर वालों की समझनी चाहिये,
    भलेही काकाजी ना हो।
    पर दादाजी जैसे पापा तो बचाते है,
    माँ-पापा बनने पे बडी़ जिन्मेदारीया होती है उनपे,
    यह बात एक बच्चे की तरह तो समझते हो।
    -आदिती

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    A talk with teenagers for them
    By me
    Part-7
    Read the caption
    Last paragraph-
    //माँ-पापा को उनकी इस जिन्मेदारीयों,
    में सफल आप बनायेंगे।
    उन्हे उनकी गलतीया तो बताइये,
    वो माँ/दादी, पापा/काका/दादा सब बन जायेंगे।
    -आदिती//
    To be continued...