• jigneshpatel 6w

    An Emergence of the "desire."

    Every "desire" is born through an idea (Form of a thought or personality) that is constantly trying in vain to find satisfaction in the form of experience,
    But it is possible to experience limited experience only by a limited experiencer,
    Which, despite being crowded within, continues the inner isolation And the vain attempts to supply that loneliness with objective satisfaction,
    Take a form of the" desire" on the periphery.

    Greetings~

    इच्छा का जन्म उस विचार के रूप( व्यक्तित्व या मुखौटे) के माध्यम से होता है,
    जो अनुभव के रूप में संतोष पाने की सतत व्यर्थ कोशिश कर रहा है, लेकिन एक सीमित अनुभवकर्ता के द्वारा सीमित अनुभव का ही अनुभव संभव है, जो भीतर भीड़ होने के बावजूद भीतर के अलगाव को सतत जारी रखते है,
    और उस अकेलेपन की आपूर्ति को वस्तुगत संतोष के द्वारा आपूर्त करने के व्यर्थ प्रयास परिधि पर एक "इच्छा" का एक रूप ले लेते है।

    नमन।~ {Jignesh,  An identity}