• amritpalsinghgogia 5w

    A-472 रावण 8.10.19

    मार दिया रावण को मैंने मार दिया।
    न जाने किसने मुझे हथियार दिया।
    भीड़ बड़ी थी बीच में ही फँस गया।
    मन की बात से मैंने इन्कार किया।।

    मरने वाले बिना साँस के मरते देखे।
    उसको तो हमने ज़िंदा ही मार दिया।
    उसकी शिक्षा, दृष्टि करके अनदेखा।
    हमने उसके जीवन को उघाड़ दिया।।

    लक्ष्मण भी तो गए थे उससे मिलने।
    उन्होंने तो लक्ष्मण का उद्धार किया।
    ज्ञान सूत्र की बातें जो उनसे मिलीं।
    उन्हीं बातों ने उसका सिंगार किया।।

    हमें सीख मिले तो लेनी ही चाहिए।
    'पाली' ने कब इससे इन्कार किया।।

    अमृत पाल सिंह 'पाली'