• solitary_souls 5w

    ए ज़िन्दगी तू भी बड़ी मज़ेदार है...
    इठलती सी उलझती रहती है तू सबको...
    समय कि साथ रचती तू खेल अनोखे...
    कभी हँसती - हँसाती , कभी रूठती-मनाती तू...
    कभी सपने एकदम से कर देती है सच...
    कभी बस ज़िंदगी को देती तू थाम ज़रा...
    अब तो बस तेरी अदाओ से ऐसी बेपनाह मोहाबत हो गयी है...
    की तेरे जुल्मों सितम भी बस तेरी अदा लगते है...
    और तेरी हर अदा के ज़िंदगी हम अब क़ायल हो चुके हैं...
    सो ना अब तुझसे कोई शिकवा है ना कोई शिकायत है...
    तू हर रूप में बस क़बूल है ..क़बूल है.. क़बूल है...

    ©solitary_souls