• kalam99 5w

    Bachpan

    आज फ़िर बचपन की
    यादें अाई है।
    कुछ हंसाई है कुछ
    रुलाई है।

    बेकार का वो जिद पन
    गुडो गुडिया से वो अपनापन
    छोड़ आईं मां के घर
    क्यों की आज मै
    हुई पराई।

    आज फिर बचपन
    की याद आई हैं।

    वो डांट भी मां
    की आज बड़ा
    सुखदाई है।
    क्यों न लौट जाऊ
    वहा जहां से यादे भी
    लौट आई हैं।

    वो गोद पापा का
    वो नरम हांथो का
    एहसास मा का
    आज फिर से बड़ी
    रुलाई है।

    वो लडकपन की गलतियां
    आज फिर याद आईं है।

    बेकार की बातो में ऐंठ जाना
    कंचे बलले को ही अपना समझना
    आज बीती बातें भी बड़ा सुखदाई है।

    माना मौज मस्ती के वो दिन थे कभी हंसी कभी गम थे।
    किसी रानी से भी थोड़े ना
    ही कम थे।

    आज फ़िर बचपन
    की यादें आई हैं।

    आज वर्तमान बड़ा हरजाई है।
    सिर्फ संघरष और परिश्रम की
    भेरपाई हैं।
    जिवन का यही सत्य ही
    सुखदाई और फलदाई है।
    आज फ़िर बचपन की यादें आई हैं।
    ©kalam99