• royal_pandit 23w

    किसान

    हां मैं एक किसान हूं , अपना गीत सुनाता हूं ।
    ये धरती मेरी माता , मैं धरती पुत्र कहलाता हूं ।।

    कफन मेहनत का बांध कर मैं , खेती में लग जाता हूं ;
    पसीना रोज बहाता हूं , तो दो रोटी खा पाता हूं ।
    खून- पसीने की बारिश से , फसल अपनी उपजाता हूं ;
    फिर सूखे की मार से मैं , मिट्टी में मिल जाता हूं ।।

    हां मैं एक किसान हूं , अपना गीत सुनाता हूं ....

    नेताओं के वोट बैंक का , जरिया मात्र रह जाता हूं ;
    राजनीति की चक्की में , पिस्ता ही चला जाता हूं ।
    कर्जमाफी के नाम पे मैं , बिकता ही चला जाता हूं ;
    चुकाते -चुकाते कर्ज फिर वो , मिटता ही चला जाता हूं।।

    हां मैं एक किसान हूं , अपना गीत सुनाता हूं .......

    साहूकारों की भरके जेव मैं , खाली खुद हो जाता हूं ;
    और करके अमीर उन्हें मैं , गरीब खुद हो जाता हूं ।
    दृढ़ संकल्प की नींद लेकर , रात अपनी बिताता हूं ;
    और कठोर खुद बनकर फिर मैं ,भारत मजबूत बनाता हूं ।।

    हां मैं एक किसान हूं ,अपना गीत सुनाता हूं ;
    ये धरती मेरी माता, मैं धरती पुत्र कहलाता हूं!!!
    ©_niket_tiwari_