• philosophic_firefly 5w

    इन छोटी छोटी उलझनों को कैसे जीतूं बाबा?
    इन छोटी छोटी बातों को कैसे नकारूं बाबा?
    जीने को कोई आस नहीं, दुःख सुनने को कोई पास नहीं
    तेरे आंगन में फिर से अब कैसे चहकूं बाबा?


    ©philosophic_firefly