• ravisinghcancer 11w

    To Irrfan !

    बेचारा कहां जानता है, खलिश है ये या खला है
    शहर भर की ख़ुशी से ये दर्द मेरा भला है

    जश्न ये रास ना आए, मज़ा तो बस गम में आया है

    मैंने दिल से कहां, ढूंढ़ लाना ख़ुशी

    नासमझ लाया गम, तो ये गम ही सही...