• sanjay_writes 23w

    तुम्हारे साथ आजकल ।
    यूँ हर जगहा रहता हुँ मै तनहा छोड़ के जाने वाली ।

    हद से ज्यादा सोचू तम्हें ।
    बस यहीं सोचता हुँ मैं मोहोब्बत के जाल में फ़साने वाली ।

    पता नही हमारे दर्मियान तुम्हारे खतम करने के बाद भी ये कौन सा रिस्ता है मुझे बीच रहाँ में छोड़ के जाने वाली ।
    लगता है के सालो पुराना अधूरा कोई किस्सा है दुनियाँ से वाक़िफ़ कराने वालीं ।

    तुम्हारी तशविर मे मुजै अपना साया दिखता है बेजान हलचल को महसूस करवाने वालीं ।
    मेहसूस कर्ता है जो ये मन वोही तो लिखता है मेरे शब्दों को बिखरा हूँआ छोड़ के जाने वाली।

    तुम्हारी अवाज़ सुनने को हर पल बेकरार रहता हुँ अशको में आँसू देकर जाने वालीं ।
    नही करूँगा याद तम्हें मैं खुद से हर बार कहता हुँ यादों में आकर भूला देने वाली ।

    नाराज होकर जाने वाली बस यही एक गुजारिश है बेनाम मोहोब्बत को अपनाने वाली ।
    मेहकी हुयी इन साँसो कि साँसो से सिफारिश है बेपनाह दर्द में भी मुस्कुराहट देकर जाने वालीं ।

    आत्माओ का मिलंन है हमारा ये एहसास दिला के जाने वाली ।
    फिर भी मुझे भूल जाती हो प्रेम के ढाईं अक्सर पड़ाने वाली ।

    दिल के ज़ख्मो को ऐसे ना कुरेद !
    मेरे दिल को चीर के जाने वाली ।

    कही मर ही ना जाएँ हम !
    मौत से जिंदा करने वाली ।

    ऐ ज़िन्दगि भर के लिए रूठ कर जाने वाली ।
    तू भी खुश तो नही होगी मुझे रुला कर जाने वाली ।

    मेरे दर्द कि हर एक चिक से तू भी तडप उठेगी ।
    इस जिस्म पे बेपनहा ज़ख्मो को सजा कर जाने वाली ।

    एक में ही हूँ जों नहीं भटकुँगा उसकी खोज मे दर दर ।
    मेरे भी अक्ष तलाशेंगे कुछ मुझको भुला कर जाने वाली ।

    जो छुपान भी चाहो तो तुम ये आसूँ सब कह देंगे ।
    मेरी मोहोब्बत के निशांन दूनियाँ से छुपा कर जाने वाली ।

    अंजाम ए मोहोब्बत का ना दिखाओं बेवफाई करने वाली
    कही ड़र ही ना जाएँ मोहोब्बत को बदनाम करने वाली

    आओ बैठो दो घड़ी कुछ बातें मोहोब्बत कि कर लो मुझे बहला कर जाने वाली ।
    तोड़ दो अब खामोशी कही बाहरे गुज़र ही ना जाएँ मुझे दीवाना बना कर जाने वाली ।

    कुछ ओर घड़ी दिल के पास बैठने का भ्रम बानए रखो तन्हा अकेले छोड़ के जाने वाली ।
    देखो ना ऐसे प्यार से कही हमारी सांसें बहार ही ना जाएँ मीठी बातों का जादु चला कर जाने वाली ।

    सूरज भी आता है सफ़र मे एक तुम्हारी झलक पाने चाँदनी रातों को मोहित करने वाली ।
    आजाओ कही कायनात से शामे सुभा मे ही ना जाएँ ।
    दर्द देकर भी मुस्कुराने वाली ।

    अगर मय्यत मे भी खामोश रही तो दूनियाँ क्या कहेगी ।
    दो आँसु ही बहा देना ऐ सुखी पलकें झुकाने वाली ।

    यहीं सकूं है अब तो हमें मौत भी आयेगी ज़िन्दगि मे एक रोज़ ।
    रोएँगे मुझको भी खुदा के फरिश्ते उस दिन बहुत प्यार कर के भूला देने वाले ।

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    जाने वाली