• amittribhuwan 39w

    कुछ उसने कहा
    ना समझ पाया जिसे कोई
    मैंने हर दर्द बस कुछ यूं ही
    दिल में छुपा लिया
    दिल की हर धड़कन पर
    नाम उसका आता है
    हवाएं जो चलती हैं
    पैगाम उसका आता है
    कहीं भी रहूं मैं
    इस जमाने में
    लेकिन हर शाम
    ख्याल उसका आता है
    ख़त उसे लिखता हूं
    आज भी मैं लेकिन
    अब नहीं उसका
    जवाब कोई आता है।

    अमित त्रिभुवन
    २५/०२/२०२०
    रात ११:०५ मुम्बई में लिखी हुई रचना है।
    ©amittribhuwan