• oracular_ 10w

    झाँकने वालों की फेरहिस्त लंबी है यहाँ
    ठहर जाती हैं अब हवाएँ भी
    उन्हें देखकर

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    अफ़सोस रहा उसके मकान को अपनी मुद्दतों पर
    आखिर नींव पड़ीं भी तो किन अंधो के शहर में

    नासमझ अपने लालटेनों से ढ़ूँढ़ते रहे
    एक झरोखा उसके आशियाने में

    जब एक जमाने से बैठा था
    वो सारे किवाड़ खोल कर

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