• jazbat 6w

    Adoption

    पूरी ठसक से इठलाकर
    उसने अपनी गठरी उठाई थी
    मारे ख़ुशी के उसकी आँखें भर गई थी
    होकर उतावली वो हरेक के गले मिल आयी थी
    सर जी ने पीठ थपथपाई और दोस्तों को चिढ़ बड़ी आयी थी
    पर उसने कहाँ की थी किसीकी परवाह
    उस पर तो जैसे ईश्वर ने मेहर बरसाई थी
    इसीलिए गोद लेने की रस्म के बाद आज उसकी
    अनाथाश्रम से अपने नए घर में विदाई थी ।
    ©jazbat
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