• hem___ 36w

    ख़ास

    विशाल समुद्र के बीच बैठा नाविक क्या सोचता होगा।
    उस सोच को हक़ीक़त बनाने के लिए क्या करता होगा।।

    क्या अनछुए आसमान को छूने के लिए ऊंची उड़ान भरेगा।
    या समुद्र की गुम सी गहराई को नापने के लिए डुबकी लगाएगा।।

    क्या अपनी दिशा को रोशनी देने के लिए जुगनुओं का सहारा लेगा ।
    या दूर चमतके ध्रूव तारे को अपनी मंजिल बनाएगा।।

    क्या शब के अंधेरे से हार मान जाएगा।
    या उसके अगले रोज़ अपनी मंज़िल की तरफ फिर कदम बढ़ाएगा।।

    क्या अपनी उम्मीदों को सूरज की तरह डूबता देख रुक जाएगा।
    या लहरो के साथ अपने सपनों की राह पर चलता जाएगा।।

    शब-ओ-रोज़ खुदा से एक सवाल जरूर करता होगा।
    की क्या ये समुद्र सभी से ऐसे पेश आता हैं या मैं कोई ख़ास हूँ।।

    ©hem___