• rjmanjeri 52w

    याद

    देखो पर्वतों पर ,घटा छा रही है।
    किसी को किसी की, याद आ रही है।
    देखो पर्वतों....।
    उड़ते पंछियों की, उड़ानों को देखो।
    छोड़ कर गगन को, वो जा रहे हैं।
    देखो पर्वतों....।
    जाने वो कहाँ होगा ,कैसा होगा ?
    मन भी मेरा अब तो ,घबरा रहा है।
    देखो पर्वतों ....।
    कहीं शाख़ पर होगा, उनका बसेरा।
    ना कल ख़बर उनको, ना कोई फ़िकर।
    देखो पर्वतों....।
    पास आ जाएं मिलन की वो घड़ियाँ।
    गुज़र ना जाये कहीं दिन के उजाले।
    देखो पर्वतों....।

    ©Rj Manjeri
    27.11.2019