• anamikakujur_ 11w

    सुनो! मैं तुम्हारा आईना हूँ, और कुछ है जो मुझे तुमसे कहना है।

    ये जो तुम फिरसे यूँ खुलकर मुस्कुराने लगी हो,
    सारी जो बातें तुम सबसे छुपाया करती थी वो अब जब तुम किसी-किसी को बताने लगी हो।
    रात को फिर जो तुमने जल्दी सोना शुरू कर दिया है,
    और वो हर लम्हा जो तुमने इन्न दिनो दिल से जिया है।
    ये सब और वो सरी ख़ूबियाँ जो तुममें है, वो तुम्हें रोज़ तुम्हें तुमसा ही और तुमसे ज़्यादा ख़ूबसूरत बनाते है।

    तो इसलिए तुम हर रोज़ जब मेरे सामने खड़ी होगी और ये सवाल जो तुम रोज़ खुदसे और मुझसे पूछोगी “की क्या मै ख़ूबसूरत या क्या मै बाक़ियों से या कोई मुझसे ज़्यादा ख़ूबसूरत है?”
    तो मै रोज़ एक ही बात दोहराऊँगा, तबतक जबतक तुम्हें विश्वास ना हो जाए इस्स बात पर कि “तुमसे ज़्यादा अगर कोई ख़ूबसूरत है, तो वो हो तुम ख़ुद।”🌼

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    “तुमसे ज़्यादा अगर कोई ख़ूबसूरत है, तो वो हो तुम ख़ुद।”🌼