• arneelimathakur 51w

    दर्द

    बड़ी उदास रात है,चाँद का नूर भी मद्धिम है
    लगता है,चाँदनी के बिछोह में रोया है ,रात भर।
    आलम सारा भीगा हुआ ,आंसुओं में तर सा है
    कोर कोर मन का भी,यूँ ही परेशां है ,उस बिन।
    पर दर्द ठान चुका है,की बस अब और नही।।