• msr_prose 13w

    तेरे इश्क़ में फ़ना होने के बेसब्री से इंतज़ार में हूं,
    जिस दार पे हो रहे है सर क़लम आशिकों के,
    आज मैं भी उस क़तार में हूं।
    बस थोड़ी सी उल्फ़त हो रही है मुझे इस
    दरिया में डूबने से,
    क्योंकि मेरी कश्ती सहिलो पर थमी हुई है,
    और मैं मुसाफ़िर मझधार में हूं।
    ©msr_prose