• harsha_joshi 5w

    हम न लिखते पर क्या कहें, क़लम ने मजबूर कर दिया..
    उनकी ख़ूबसूरती को देख, हमारे दिल ने शोर बंद कर दिया..
    ‘रेशम सी ज़ुल्फ़ें’ सब कहते हैं,
    तो ये अल्फ़ाज़ तो छोटा हो गया ..
    ‘चाँद सा नूर’ भी अब पुराना हो गया ..

    कैसे बयाँ करें उनकी एक झलक के ‘जादू’ को ..
    जिससे ये दिल बरसात में मोर हो गया ..
    उनकी हँसी की खिलखिलाहट से, बीच दोपहर, सुबहों वाली चिड़ियों सा शोर हो गया..

    उनकी मदहोश हँसी से उनके चेहरे की लकीरों ने, हमारे होंठों को सी दिया..
    उनकी आँखों की चमक ने, पानी में तेज़ धूप पडने सा असर कर दिया..

    उनके चलने से जो हवा सरकी, तो पहाड़ों की ख़ुशबू का तजुर्बा हो गया..
    शायद क़िस्मत उस दिन ‘सोने’ की थी हमारी, उनकी नज़रें हमें देख झुकीं....

    और वो एक पल का एहसास, जन्मों के लिए अमर हो गया..

    ©हर्षा जोशी