• pankajsingh22 24w

    वक़्त

    पहले तू क्या था और अब क्या हो गया,
    उस चाँद का मुझसे तवज्जो देता था,
    अब लगता है तू उस चाँद में खो गया,
    मेरे मौन को तू मजाक समझा,
    तो मेरे ख़ुशी को राख,
    सब वही है तू बस बदल गया,
    ये सब मीठी बात नही वक़्त की गलती है।

    कभी मेरी तस्वीर सिराने रखता था,
    तो कभी याद में मुझे छुपाये रखता था,
    अब वो तस्वीर लगता है तेरे सिराने से हट गया,
    और वो तेरा याद टुकड़ो में बट गया,
    मैं तो उसी सोच में आने की कोशिश करता हु,
    अभी भी तुझपर मरता हु,
    सब वही है,बस सिराने और सोच में कोई और आगया है,
    गलती तेरी नही सब वक़्त का खेल है।