• msr_prose 8w

    सैनिक!!

    एक सैनिक की ज़िन्दगी भी कितनी बेशुमार है।
    देश की सहादत को लेके उसमे कितना खुमार है।
    हां, अपनों से रिश्तों को तोड़ मुल्क की हिफाज़त में खुद में ही कहीं खो जाता है वो।
    छोड़के मकमले बिस्तर के आंचल को, काटों भरी ज़मीन पर सो जाता है वो।
    जब रखी हो जान हथेली पे , उस दिन को रमजान कहता है वो।
    मिट्टी को अपनी महबूबा और वतन को हिन्दुस्तान कहता है वो।
    हर मुसीबत को ज़र्रा समझ टाल देता है वो।
    उगलते बारूद के ज़हर में इंकलाब की गोली डाल देता है वो।
    चलो आज उन शहीदों को चिराग़ से चमन करते है।
    उनकी रूह की खैरियत के लिए सिर झुका के नमन करते है।
    ©msr_prose