• sampadapandit 9w

    जुनून ए दास्ताँ

    जो चल पड़े है
    वो कभी रुकते नहीं,
    झुकते नहीं ,
    थकते नहीं

    होसले बुलंद इतने
    की हार से डरते नहीं ,
    थमते नहीं ,
    मुड़ते नहीं

    ना आँधियों का भय इन्हें
    ना जलप्रलय मिटा सके
    ये चीर के बाधाएँ सब
    अपने रास्ते बना चले

    कामयाबी के प्यासे हे ये
    डटकर हे ये चलाकरे
    श्रमसाध्य ये कर्म करे
    ना फल की आरज़ू रखें

    यत्न, जतन,श्रम ही बस
    इनके हमसफ़र बने
    जुनून इनके हे बुलंद
    पराजय को भी मात दे

    आसमा को चीर के ये
    चाँद से हे जा मिले
    प्रगतिपथ के राही ये
    इतिहास ये लिखते चले,
    लिखते चले,
    लिखते चले।
    ©sampadapandit