• rjmanjeri 70w

    सपना

    कब ऋतु बदली कब घटा घिरी
    कब क्षण पलक मूंद मैं सोई थी
    कुछ आहट थी कुछ सपना था
    लगता सब कुछ अपना था
    कब खुशियों की झड़ी लगी
    क्या तुझे पता वो सपना था
    सपना था वो सच्चा था
    यही कहूँ तो अच्छा था
    ना आस रहे ना याद रहे
    जो जिसका था वो उसका था
    एक सपना था बस अपना था।
    ©Rj Manjeri