• aashiq_ki_kalam_se 31w

    देश सो रहा है..

    देश सो रहा है....

    शशशशशशशश.. देश सो रहा है,
    गेहरी नींद में सन्नाटे का तकिया लिए,
    बेशर्मी की चादर ओढ़े,
    हैवान की गोद में,
    देश सो रहा है।।।

    चल पढ़ा है नींद में,
    इंसाफ को रौंदे ,
    गुमनामी के रास्ते चला पढ़ा है,
    देश सो रहा है।।।

    होश में लाने की कोशिश भरपूर की गयी,
    कभी निर्भया तो कभी आशीफ़ा के नाम पर,
    पर अब उनके हादसे किस्से बनकर रेह गए है,
    क्योंकि देश सो रहा है।।।

    अंधेरे की ओर,उजियारे से दूर,
    इंसानियत के चेहरे पर,
    रोज़ कालीक पोते पड़ा है,
    देश सो रहा है।।।

    हैवानियत को गले लगा कर,
    बच्चियों को लाचार बनाकर,
    उनकी इज्जतों के साथ खेले पड़ा है,
    देश सो रहा है।।।

    आज मेरे साथ सबका दिल टूट चुका है,
    इंसानियत पर से ऐतबार टूट चुका है,
    नींद किसीको आ नहीं रही है,
    मगर देश सो रहा है।।।

    एक खौफ पैदा हो गया है उन आँखो में,
    जो कभी लड़‍कर भी बाहर घूमने जाया करती थी,
    आज वो आखें बेजान है,
    क्योंकि देश सो रहा है।।।

    मेहफ़ुज़ ना तो
    अब किसीकी बहन , और ना ही किसी की बेटी है,
    आबरू सबकी हर रोज़ अख़बारों में बिक रही है,
    और देश सो रहा है।।।

    चौराहे पर मोम जलाकर,
    भूलने का कोई किस्सा नहीं हुआ है,
    किसी बच्ची का अतीत नहीं,
    उसके भविष्य का खात्मा हुआ है,
    और देश सो रहा है।।।

    सोने दो, जगाओ मत,
    नींद की गहराईयों में दफन है, उठाओ मत,
    बदलना है तो खुद, और खुदकी सोच को बदलो,
    क्यूँकि देश???
    देश तो सो रहा है,
    वो तो सो रहा है.....
    शशशशशशशशशशशशशश.....

    -© अभय