• harshkheraa 5w

    एक बात बताऊं?
    पर्दों के पीछे छिपी हो जैसे ,
    कुछ दिल की बातें दबी हैं वैसे,
    उस अंदर अंधेरे कमरे में,
    कुछ गुमसुम गुमसुम होने में,
    ये अलग सुकून सा खिलता हैं,
    ना जाने चुप रहकर ही बस क्यों,
    ये मन को चैन सा मिलता हैं,
    ना आने देना किसी को समझ,
    तुम छाल नहीं जड़ हो पेड की,
    उसमे अलग ही मज़ा है,
    एक बात बताऊं?
    इस बिना दरवाजे के घर में,
    ये जाल वाली खिड़की लगी हैं ऐसे
    कुछ दिल की बातें दबी हो जैसे।