• pragatisheel_sadhak_bihari 30w

    प्रमाण

    सच को किसी से प्रमाण की जरूरत होती नहीं है,
    जैसे मौत.......किसी के एहसान तले रोती नहीं है!

    होते हैं शिकार बहुत.....जो करते नहीं खातिरदारी,
    सच रोता है,झूठ तब भी नज़र से दूर सोती नहीं है!

    जा किसी और को दिखाना,अपने दो कौड़ी के पद,
    तेरे पदभार से दहशत.....इस दिल में होती नहीं है!

    देखा है तुम्हें खिचड़ी खाते हुए,बातें जैसे जमींदार,
    पहले ढंग के भोग लगा लो...डर यहाँ होती नहीं है!

    जन्म लिया नहीं,,लोग आईने दिखाते हैं दूसरों को,
    कैसे इन्हें...माँ बाप के उम्र का ख्याल होती नहीं है!

    कुकर्मों के पूरे चिट्ठे.........तैयार रखे हैं हम इनके,
    पर हमारी विनती......कहीं भी सुनी जाती नहीं है!

    घर के बहुत एडवांस होती हैं..... वो सारी बालाएं,
    जो फेसबुक की दुनिया में भी......शर्माती नहीं हैं!

    बदलती हैं रोज डीपी....... पाउडर लगा लगाकर,
    खुलेआम गुलछरे लड़ाने से...वो कतराती नहीं हैं!

    ©gatisheel_sadhak_bihari