• mr__maurya 51w

    बस देख रहा हूँ

    तुम्हें आना हैं जहा से, वहीं देख रहा हूँ
    पता नहीं तुम आओगे या नहीं, फिर भी देख रहा हूँ

    आसमान मे चांद, तारे, बादल न जाने क्या क्या हैं
    फिर भी नजर उठाये, बस तुमको देख रहा हूँ

    दुनिया वाले मुझसे नाराज क्यूँ ना हो
    आवाज दे कर उन्हें, मैं कहीं और देख रहा हूँ

    लोग तरह तरह से होते है बर्बाद इस शहर मे
    मैं हुआ बर्बाद क्यूँ, बस तुम्हें ही देख रहा हूँ


    - मौर्य रोहित