• jayraj_singh_jhala 30w

    सुख तो चूका ही है समंदर,अब अंगारा बनते देख रहा हूँ
    बेबस नज़रो से मेरा देश बदलते देख रहा हूँ

    उसूल तो ना होगा तेरे मज़हब का,मुझे बर्बाद करना है
    ना ही मेरे धर्म मे लिखा है,तुझे बर्बाद करना है
    बेवजह बर्बादी की ज़िद में देश बर्बाद होते देख रहा हूँ
    सुख तो चूका ही है समंदर,अब अंगारा बनते देख रहा हूँ

    तुझमें गर काबिलियत होती,आरक्षण का सहारा ना लेता(शिक्षा में)
    मुझमें गर काबिलियत होती,आरक्षण की भीख ना माँगता
    आरक्षण के नाम पर देख का भक्षण होते देख रहा हूँ
    सुख तो चूका ही है समंदर,अब अंगारा बनते देख रहा हूँ

    कुछ उदरपूर्ति के लिए दरिन्दों की हवस बुझा देती है,
    कुछ जिस्म की नुमाइश कर दरिन्दों में हवस जगा देती है
    शराफत का चोला पहने कुछ संतो का भी ईमान बदलते देख रहा हूँ
    सुख तो चूका ही है समंदर,अब अंगारा बनते देख रहा हूँ

    बेबस नज़रो से मेरा देश बदलते देख रहा हूँ..........


    ©jayraj_singh_jhala