• chahton_ka_prinda_sanjay 24w

    #गजल (रहा हूँ)

    जो तुमने नहीं कही वही मैं बाते सुन रहा हूँ
    ख्वाबो को अपने मैं इस तरह से बुन रहा हूँ

    निगाहो में चेहरा रहता है आपका ही सदा
    उन बातो से अलग मैं राह चुन रहा हूँ

    रह लूँ तन्हा, महफ़िलो की आगोश में ही
    ऐसे मैं बना अपनी जिंदगी की धुन रहा हूँ

    बेघर हो जाता हूँ, पास जब तुम होते नहीं
    तुम्हारे ख्यालो से सुलझा अपना कुल रहा हूँ

    तुम्हारी बाते लगातार मुझमे रह जाती है
    बाकी सब फलसफा पल पल भूल रहा हूँ

    जीने की सिर्फ तुम संग ख्वाहिश है संजय
    जहाँ तुम हो, सिर्फ वही बाते क़ुबूल रहा हूँ

    © चाहतो का परिंदा----संजय