• yashashvigupta_07 11w

    इस पेड में
    कल जहाँ पत्तियाँ थीं
    आज वहाँ फूल हैं
    जहाँ फूल थे
    वहाँ फल हैं
    जहाँ फल थे
    वहाँ संगीत के
    तमाम निर्झर झर रहे हैं
    उन निर्झरों में
    जहाँ शिला खंड थे
    वहाँ चाँद तारे हैं
    उन चाँद तारों में
    जहाँ तुम थीं
    वहाँ आज मैं हूँ
    और मुझमें जहाँ अँधेरा था
    वहाँ अनंत आलोक फैला हुआ है
    लेकिन उस आलोक में
    हर क्षण
    उन पत्तियों को ही मैं खोज रहा हूँ
    जहाँ से मैंने- तुम्हें पाना शुरु किया था!