• kumar_atul 24w

    तेरा साथ

    लफ्ज़ बिखेरू तो शाम आ जाए,
    तेरे साथ थोड़ा बैठूं तो रात आ जाए।
    .
    तू बस उम्मीद करे मेरे रुकने की,
    मैं जो उठ कर चलने लगूँ तो तू साथ आ जाए।

    ©kumar_atul