• rohitsrivastva 6w

    मन की बात

    काश किसी दिन तुम ओर मैं कही दूर चले जाते
    वहा जहा कुछ ना होता तुम्हारे ओर मेरे शिवाये
    बस नदियों के पानी का सोर ओर हलकी हवाये
    चंद की इतनी ही रौशनी होती जिसमे मैं तुमको ओर तुमको देख पाता
    एक कम्बल ओर बस थोड़ी सी आग होती पेड़ो की छाव होती
    तुम्हारा हाथ मेरे हाथो मे ओर बस हलकी सी मुस्कान होती
    मैं खुद को तुम्हारी आँखो मे देखता ओर आँखो ही आँखो मे बात होती
    चांदनी रात मे कोयल की कुक मे पूरा आस पास सराबोर होता
    तुम चुपके से मेरे कंधे पे सर रखती ओर मानो वक़्त वही रुक जाता
    वो मेरा तुम्हारे माथे को चूमना ओर तुम्हारे सर पे अपना सर रखना
    ओर महसूस करना तुम्हरी धडकनो को ओर तुम्हारा सिमट जाना
    मेरे हथो को दोनों हाथो से दबाना ओर खुद को महफूज करना तुम्हारा खुद को मेरी बाहो मे
    मेरा तुम्हे ओर करीब लाना ओर खुद के पास लाना ओर मानो खुद को छुपा लेना तुमको खुद me
    वो मेरा तुम्हारे पलकों को चूमना ओर आँखो मे देखना ओर तुम्हारा पलके झुका लेना
    मेरा तुम्हारे गलो को चूमना ओर बालियों को छूना
    वो तुम्हारे कंधे पे प्यार से चूमना ओर ओर तुम्हारा मानो छुई मुई के पेड़ की तरेह सिकुड़ जाना तुम्हारा बदन ठंडा पार जाना ओर तुम्हारा मेरा हाथ पाकर के खुद की ओर खींचना

    तभी माँ का चिलाना नालायक कब उठेगा ओर फ़िर क्या वही पुराना दफ्तर ओर घर कल फिर देखूगा सपना ओर बताउगा आपको
    काश तुम मेरी होती ओर वो वक़्त वही रुक जाता काश ये सपना सच हो जाता

    सपना थोड़ा ओर है अच्छा लगे आपको तो आगे बताउगा

    मेरी कलम
    ©rohitsrivastva