• suruchisharma 23w

    खुल के करो जरा इजहार-ए-महोव्बत की बात
    अधूरी बातों में तो लफ्ज भी छिप जाते हैं
    अगर हो महोव्बत में फौलाद सा असर
    तो पत्थर दिल भी पिघल जाते हैं
    ©suruchisharma