• krishna3498 5w

    ❤।।मोहब्बत-ए-दिल।।❤

    इस बात की, ना तुझे खबर थी ना मुझे।
    बस हम थे खयालों में उल्झे।
    वो दौर ही थे कुछ सुल्झे।
    मोहब्बत-ए-दिल अब प्यार नहीं है तुझे।
    वो चंद खुशीयों की थी घडी।
    सामने पुरी जिंदगी थी पडी।
    मोहब्बत नफरत के थी दरवाजे खडी।
    ये दुनिया है मुसाफिरों की बडी।
    मोहब्बत-ए-दिल ने देदी ये सजा बहुत हि कडी।
    याद होंगी वो सुहानी सी रातें।
    जिनकी अब हमें नहीं करनी है बातें।
    बिना याद किये अब भी नहीं सोतें।
    मोहब्बत-ए-दिल तुम्हे अब भी हैं चाहतें।
    ©KRISHNA..