• rohitsrivastva 10w

    युही

    मेरी याद भी अब तुझे भूलने लगी है
    तू कपड़ो की तरेह मुहब्बत भी बदलने लगी है
    तेरी तस्वीर जेहन से अब धुलने लगी है
    अब मैं रोता नही हु तेरे वास्ते आँखे बस धुलने लगी है
    मैं रोज तुझे रोज याद करता हु आयत की तरेह ओर एक तू है जो रोज अपनी तस्वीर बदलने लगी है

    जान बस्ती है कहा बताया दोस्त को वो दुश्मनो से जा मिले
    दरिया को चाहा तो वो समंदर से जा मिले
    हर सकस दौरता है यहाँ भीड़ की तरफ
    फ़िर ये भी चाहता है उसे रास्ता मिले
    ओर इस दौर मे सब कुछ सही हो नही मुमकिन
    ये जरुरी नही जिस सक्श की खाता हो उसी को सजा मिले

    मुहब्बत लाइलाज बीमारी है इसमें सब कुछ भूल जाते है
    जावा नजरों पे वो ऊगली उठाना भूल जाते थे
    ये पुराने लोग है ये अपना जवाना भूल जाते है
    जो गालिया देते है मुहब्बत को अपनी पुरानी कहानी छुपानी भूल जाते है

    कुछ नसीबो मे उम्र भर के वो हाथ नही होते
    कुछ मिलते है सफर मे जिनसे फ़िर मुलाक़ात नही होते
    हवा भी रुख मोर लेती है आज कल हमें देख के
    मिलते तो है वो रोज हमसे सैर पे बस अब उनसे हमारी बात नही होते


    मेरी कलम
    ©rohitsrivastva