• anamikakumari__ 5w

    नारी ,प्रेम और भय

    कभी बेचने को उसे , सरहदों के पार ले जाया गया
    तो कभी रोकने को उसकी सांसे, घर में ही दफनाया गया।
    औरत पर ये अत्याचार का सिलसिला, आज का नहीं
    ये तो सदियों से अपनाया गया
    पर सच कहूं तो, नारी की हिम्मत का भय, राजाओं को भी था
    तभी तो मासूम सी अनारकली को,
    महल की चारदीवारी में चिनवाया गया।
    हिम्मत तो बहुत थी ,
    पर ना जाने क्यों ,ख़ामोश रहकर वो सब सहती रहीं
    आंखो की बहती नदी को रोक, वो होंठो से हंसती रही
    चरित्रहीन ना होते हुए भी,
    वो राम के लिए अग्निपरीक्षाएं देती रही
    नफरतों और जिल्लतो के घूंट पी पी कर,
    खुद की ही खुशियों की बलि देती रही।।
    लेकिन इन सब के बदले में उसे क्या मिला।।
    उसे बांझ बुलाकर, उसकी ममता को गाली देकर, उसे ही घर से निकाल दिया
    उसके प्रेम और ममता के समर्पण के लिए
    ये दिया गया उसे सिला।।
    ©anamikakumari__