• _jiya_ 11w

    मुझमें कितनी मैं?
    ये सवाल मैं खुद से कई बार पूछ चुकी हूँ,
    पर जवाब अभी तक नही मिला।
    मुझमें कितनी मैं हूँ ये भी मैं नही जानती,
    उन हज़ारों दुसरे सवालों की तरह जिनके जवाब मुझे रटे रहने चहियें।
    मुझे ये किसी ने नही बताया,
    ठीक उसी तरह जैसे ये नही बताया गया की क्यूँ का कोई जवाब क्यूँ नही होता।
    तीन दिन पहले किसी ने मुझसे एक आसान सवाल पूछा "कुछ बताइये अपने बारे में"
    ये सवाल सुनने में जितना सरल लगता है, मेरे लिए उतना ही कठिन था।
    क्युन्की मैं खुद को तो जानती ही नही।
    मैने हमेशा खुद्को अपनी माँ या अपने पिता की नज़र से देखा है।
    या देखा है तो अपने दोस्तों के नज़रिये से।
    पर मैं हूँ कौन?
    क्या मैं वो लड़की हूँ जो बातें अपनी उम्र से बड़ी और हरकतें अपनी उम्र से छोटी करती हूँ?
    या फिर वो जो एक पल एक हस्ती, खिलखिलाती बच्ची है, और दूसरे पल एक स्नजीदगी से भरी महिला?
    मुझमें आखिर कितनी मैं हूँ?
    और कितनी एक बेटी, एक बहन, एक दोस्त?
    क्या ये सब सवाल सामान्य हैं?
    या मैं कुछ अलग हूँ?
    मैं आखिर हूँ तो हूँ कौन?
    ये सवालों का दलदल मुझे अपने अन्दर खींचता ही जा रहा है, पर शायद मुझे जवाब मिल चुका है।
    "सिर्फ़ आत्मा नश्वर है"
    तो क्या फ़रक पढता है की मुझमें कितनी मैं!
    क्यूँकी असलियत तो सिर्फ़ एक ही है ना,
    की मुझमें कई मैं!

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    मुझमें कितनी मैं?
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    ©_jiya_