• mrz_writes 23w

    ख्वाबों को ख्वाबों में ही जी लिया करता हूँ,
    न जाने क्यों हकीकत रास नहीं आती।
    यूँहीं नहीं डर लगता है आँखों को खोलने में,
    ज़िंदगी हर मोड़ पर कुछ माँगने को खड़ी रहती है।
    © Mr.Z