• shubham_dwivedi 10w

    जानता हूँ कि तुम्हें ज़माने की फ़िक्र नहीं
    ये ही वो जज़्बात है जो तुम्हें तन्हा रखे है
    हर चाहत पूरी हो जाए तो ये जीवन कैसा
    ये ही वो सवाल है जो तुम्हें ज़िंदा रखे है

    टूटना , बिखरना तो हर खिलौने का नसीब है ठहरा
    ये ही वो ख्यालात हैं जो तुम्हें सपनों में उलझा रखे है
    ©shubham_dwivedi