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    यूं हीं तुम्हारे कोमल गाल गुलाबी तो नहीं

    सच कहो मेरे दिये गुलाबों की लाली तो नहीं

    तुम्हारे होठ भी आज सुर्ख लाल दिखते हैं

    कहीं आज हमें रंगने का इरादा तो नहीं

    ~प्रतिभापुत्र

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