• sanjeev_mrigtrishna 23w

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    ये वाइज़ की नमाज़ नहीं, सदक़ा ए इश्क़ है "मृगतृष्णा"
    काफ़िर को भी इबादत में यहां, सर झुकाना पड़ता है।
    मृगतृष्णा

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    ये वाइज़ की नमाज़ नहीं, सदक़ा ए इश्क़ है "मृगतृष्णा"
    काफ़िर को भी इबादत में यहां, सर झुकाना पड़ता है।
    ©mrigyatrishna