• digantsinh13 23w

    तेरे जाने पर रोया भी हुं
    तेरे होने पर हंसा भी हुं

    कहानी तेरी मेरी ये
    किस मोड़ पर आ रुकी है

    ना आगे बढ़ पा रहा हूं
    ना पिछे जा कर बदल सकता हूं

    थोड़ा रहम कर ऐ जालिमा
    बस इस कहानी को एक अनजान देदे

    युं मुझसे दूर भागना तेरा जैसे डर हो तुझे की कहिं प्यार ना हो जाए
    युं मेरे पास आना तेरा जैसे बस तेरा ही हक हो मुझ पर

    खुद तो उलझी हुई है इन सवालों में
    में भी अब खो गया हूं इनके जवाब ढूंढने में

    अब और ना सता ऐ माशुका
    बस आजा भाग कर मेरी बाहों में

    बस रह जा मेरे दिल में हमेशा के लिए
    बस रहने दें तेरी पलकों के नीचे मुझे हमेशा के लिए
    ©digant