• sad_eyes 47w

    मुश्किल बस इतनी है, हमें जताना नही आता
    इल्ज़ाम ये लगा है कि, हमें निभाना नही आता...!
    मिल्कियत मेरी भी बन जाती, औरों की तरह
    यूँ लूटकर अपनों को, हमें कमाना नही आता...!
    वक़्त अभी बाकी है, कुछ कर गुजरना तुम
    गुजर गया फिर लौट के, वो ज़माना नही आता...!
    अश्क बह गये, किसी की मजबूरियां देख के
    जज्बात के दरिया को, हमें छुपाना नही आता...!दोस्तों जैसा दिखता हूँ, सच में वैसा हूँ दिल से मैं
    यूँ चेहरे पे चेहरा, मुझको लगाना नही आता...!
    (Abbadur Rahman)
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