• pragatisheel_sadhak_bihari 22w

    परेशां दिल

    वायदें ज़हर है
    यादें लहर है
    जदोजहद यह कैसा दिल का
    के चारो ओर ही बुझ रहा समां है
    आसान नहीं यह ज़िन्दगी खुदा
    लोग खुद में कहाँ
    यह तो गैरों से मिला प्यार ज्यादा है
    तभी दिल खफा खफा
    ढूंढता है बस उन्हें
    जो रजा से अब सजा हैं
    ये तन्हाईयाँ, ये रुसवाईयाँ ही बस अपना
    तभी तो जीने में मजा है
    वरना ना भाव होते ना शब्द
    ना मिलन ना विरह
    ना दोस्त ना दुश्मन
    ना उतार ना चढ़ाव जीवन के सतरंगी आयाम लिये
    ना होते तरंग दिल में प्यार के
    ना होते आँसू आँखों में विरह के
    ये जो करवटें परेशां न रहती गर पूरी रात कर मिन्नतें हजार
    तब वो ना थमाती आस इस नए सुबह में कह के तम अब तो छटो
    तेरा बाप बाहर निकल आया है सूर्य के रूप में
    कुछ निठाल सा जीवन होता
    ना होती आशाएँ उमंग के
    ना निराशाएं अपनी भूल के
    यही ज़िन्दगी है
    एक दास्ताँ सफर के!
    आज जो तेरा है,कल मेरा था
    परसों किसका होगा
    क्या पता!
    पर यादें और अनुभव तो अपना है
    जो सिर्फ मेरा है!
    ©gatisheel_sadhak_bihari